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माननीयों के मंसूबों पर जनता ने फेरा पानी

फैजाबाद (अवनीश मिश्र)। 16वीं लोकसभा के गठन के लिए सम्पन्न हुए चुनाव में ताल ठोंकने वाले माननीयों में जनता ने भरोसा नहीं जताया। यही कारण रहा कि चुनावी दंगल में कूदे ज्यादातर माननीयों को हार का मुंह देखना पड़ा। सपा, बसपा और कांग्रेस ने जिन-जिन माननीयों पर भरोसा जताते हुए चुनावी नैय्या पार करने का मंसूबा पाल रखा था, परिणाम आते ही उन पर पानी फिर गया। हालांकि भाजपा की ओर से चुनाव में उतरे माननीयों ने जरूर विजयश्री हासिल किया। लोकसभा के सम्पन्न हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने दर्जन भर से ज्यादा विधायकों/विधान परिषद सदस्यों और 10 सांसदों पर दांव लगाया था। इन विधायकों में कई तो लालबत्ती वाले भी शामिल थे, लेकिन इन माननीयों का जादू चुनाव में नहीं चला। आलम यह रहा कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव, उनकी सांसद बहू डिम्पल यादव और भतीजे धर्मेन्द्र यादव के अलावा सभी माननीय चारों खाने चित हो गये। इतना ही नहीं कई लोकसभा क्षेत्र से सपा की ओर चुनाव मैदान में माननीय तो थे ही, साथ ही उसी क्षेत्र में चार-पांच लालबत्ती वाले कद्दावर मंत्रीगण भी थे, लेकिन फिर माननीय को मतदाताओं ने नकार दिया और उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। कहीं-कहीं तो ये माननीय तीसरे-चैथे स्थान पर भी चले गये। इससे ज्यादा बदतर स्थिति तो कांग्रेस के दिग्गज माननीयों की रही। कांग्रेस ने अपने पुराने सांसदों व मंत्रियों पर दांव खेला था। कांग्रेस की ओर से 8 विधायक/एमएलसी और करीब डेढ़ दर्जन सांसद चुनाव मैदान में थे, लेकिन सपा की तरह यहां भी कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी के अलावा सभी को करारी शिकस्त मिली। राहुल गांधी भी मतगणना पूरी होने तक कई बार आगे-पीछे होते रहे। अन्त में पूर्व के चुनावों की अपेक्षा मामूली अन्तरों से चुनाव जीत सके। मजे की बात तो यह रही कि कांग्रेस के ज्यादातर दिग्गज चौथे नम्बर पर सरक गये। कांग्रेस के माननीयों की स्थिति यह रही कि इसके प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सहित करीब आधा दर्जन केन्द्रीय मंत्रियों को जनता ने नकार दिया। सबसे बुरी हालत बहुजन समाज पार्टी की रही। बसपा से चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे 1 विधायक और 5 सांसदों को मुंहकी खानी पड़ी और सभी के सभी चुनाव हार गये। इनमें कई पूर्व मंत्री और दिग्गज नेता भी शामिल हैं। हलांकि बसपा सुप्रीमो मायावती इस चुनाव में किसी भी सीट पर नहीं लड़ रही थीं। माननीयों की लाज भाजपा की ओर से लड़े उम्मीदवारों ने अवश्य रखी। चुनाव में उतरे सभी 11 विधायक/विधान परिषद सदस्य चुनाव जीत गये। साथ ही भाजपा की ओर से ही ताल ठोंकने वाले चारों सांसदों पर मतदाताओं ने भरोसा जताते हुए उन्हें पुनः संसद में भेजने का काम किया। इसी तरह भाजपा से गठबंधन करके चुनाव लड़ी अपना दल की विधायक अनुप्रिया पटेल ने भी फतह हासिल कर लिया। इस सीट से सपा, बसपा और कांग्रेस ने भी माननीयों पर ही दांव लगाया था।
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