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आरएम लोढ़ा के भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने से जैन समाज में हर्ष

उदयपुर। सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश, न्यायमूर्ति राजेन्द्रमल लोढ़ा ने 27 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय के 41वें मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जस्टिस लोढ़ा को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। पुष्करवाणी समूह के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बनने वाले लोढ़ा प्रथम राजस्थानी एवं प्रथम जैन हैं। जस्टिस लोढ़ा ने जस्टिस पी.सदाशिवम की जगह ली। 64 वर्षीय जस्टिस लोढ़ा का कार्यकाल पाँच महीने का होगा। न्यायमूर्ति लोढ़ा इसी साल 27 सितंबर को सेवानिवृत्त होंगे। न्यायमूर्ति लोढ़ा ने उस पीठ की अध्यक्षता की थी जो कोयला खदान आवंटन घोटाले की सीबीआई जांच की निगरानी कर रही है। सीबीआई को राजनीति के चंगुल से मुक्त कराने संबंधी आदेशों में भी जस्टिस लोढ़ा मददगार रहे हैं। जस्टिस लोढ़ा उस संविधान पीठ के भी सदस्य रहे हैं जो अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षा प्रणाली को देख रही है। पिछले महीने उनकी अध्यक्षता वाली बैंच ने ही रक्षाकर्मियों को उन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की अनुमति दी थी जहां वे तैनात हैं। जस्टिस लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने ही देश में क्लीनिकल ट्रायल्स पर रोक लगा दी थी। मूलतः जोधपुर (राजस्थान) निवासी लोढ़ा ओसवाल कुल के जैन श्रावक हैं। न्यायमूर्ति राजेन्द्रमल लोढ़ा एवं उनका परिवार साधना के शिखर पुरुष उपाध्याय श्री पुष्करमुनि जी म. एवं आचार्य श्री हस्तीमल जी म. के प्रति श्रद्धाशील रहा है। जैन धर्म, संस्कृति तथा सभी सन्तों के प्रति उनके हृदय में आस्था है। 1949 में जन्मे लोढ़ा के पिता एसके मल लोढ़ा भी राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। 1973 में राजस्थान बार काउंसिल में वकील के रूप में पंजीकृत आरएम लोढ़ा ने राजस्थान हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। जनवरी 1994 में वे राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए और 15 दिन बाद उन्हें बाम्बे उच्च न्यायालय मंे स्थानांतरित कर दिया गया। वे 13 वर्ष तक बाम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे। फरवरी 2007 को वे पुनः राजस्थान हाईकोर्ट स्थानांतरित हुए। 13 मई 2008 को वे पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने और 17 दिसंबर 2008 को वे सुप्रीम कोर्ट के जज बने। उन्होंने अनेक न्यायिक और विधिक दायित्वों का निष्ठापूर्ण निर्वहन किया और कर रहे हैं। जस्टिस लोढ़ा के शपथ ग्रहण समारोह में पत्नी सुधा लोढ़ा, बेटियाँ रति व रीति व बच्चों सहित, भाई डॉ.सुरेंद्रमल लोढ़ा, भाभी लक्ष्मी लोढ़ा, बहनें उमा व उषा, भतीजियाँ व परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। इस अवसर पर जस्टिस दलबीर भंडारी, जस्टिस जीएस सिंघवी, जस्टिस मगराज कल्ला, महाधिवक्ता नरपतमल लोढ़ा, जितेंद्र सिंघवी, डॉ.महेंद्र जैन आदि मौजूद थे। देश के नए प्रधान न्यायाधीश का पद संभालने वाले राजेन्द्र मल लोढ़ा ने कहा है कि वह हर एक चीज जो समाज के लिए सही नहीं है, वह न्यायपालिका के लिए भी ठीक नहीं है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका को सदैव सर्वोत्तम मानक का अनुसरण करना चाहिए।
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