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गुजरात और महाराष्ट्र में भी दिखी यूपी के सीएम अखिलेश की लोकप्रियता

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं कारागार मंत्री राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ 21 अप्रैल, 2014 को अहमदाबाद एवं पाटन जाने का अवसर मिला। पाटन में मुख्यमंत्री की विशाल जनसभा हुई, जिसमें पाटन, मेहसाणा के अलावा आसपास के क्षेत्रों के किसान, पिछड़े, नौजवान तथा मुसलमान हजारों की संख्या में मौजूद थे। लोगों में मुख्यमंत्री को देखने-सुनने का इतना उत्साह था कि बच्चे-बूढे तक सड़क के दोनों छोरों पर खड़े उनके आने की प्रतीक्षा करते रहे। महिलाएं छज्जों पर और खिड़कियों से झांककर उनका अभिवादन कर रही थी। जनसभा में लगातार अखिलेश यादव जिन्दाबाद के नारे गूंजते रहे। मुख्यमंत्री मिलने के लिए अहमदाबाद और पाटन में लोगों का तांता लगा रहा। गुजरात के लोग आशा भरी निगाहों से उन्हें देख रहे थे। लोगों ने सम्मान प्रकट करने के लिए अखिलेश यादव के सिर पर पगड़ी बांधी। मुस्लिम स्त्री-पुरूष और बच्चे भी सड़कों पर निकल आए थे यद्यपि उनेक चेहरों पर दहशत साफ झलक रही थी। पाटन की चुनावी सभा में हजारों लोग सभास्थल के अंदर-बाहर मौजूद थे। महाराष्ट्र में भी मुम्बई एयर पोर्ट से होटल हाली डे इन, साकीनाका सभास्थल तक जाते हुये रास्ते में कापडि़या नगर, कल्पना टाकीज, कमानी सिगनल तथा जरीमरी साकीनाका पर भी जनता समाजवादी पार्टी के नेताओं के स्वागत-अभिनंदन के लिए खड़ी थी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने गुजरात के तमाम लोग आए। वे इस बात पर बहुत नाराज थे कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के बारे में तमाम झूठ बोलकर देशभर में उनकी बदनामी कराई है। उनका कहना था आप वाराणसी में नरेन्द्र मेादी को हरा दो, गुजरात में इस बार जनता उन्हें हरा देगी। मोदी तो उद्योगपति अडानी का एजेन्ट हैं। उसने गुजरात को तबाह करके रख दिया है। जो हालात गुजरात के दिखाई पड़े वे सचमुच बहुत दर्दनाक हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री 54 इंच का सीना दिखाते हुए किसानों की खुशहाली और गांव-गांव बिजली का दावा करते नहीं अघाते, लेकिन सच्चाई यह है कि अहमदाबाद के 5 किमी बाद से न कहीं खम्भा दिखता है न तार। पाटन जनपद का मुख्यालय है लेकिन यहां भी सड़कें टूटी-फूटी हैं। नागरिक सुविधाओं का अभाव है। नौजवान बेरोजगारी में दिन काट रहे हैं। किसानों को सिंचाई के लिए गुजरात में मंहगा पानी मिलता है जबकि उप्र में ट्यूबवेल और नहरों से मुफ्त सिंचाई सुविधा किसानों को मिली हुई है। गांवों और कस्बों की स्थिति उजाड़ जैसी है। मेहराणा में जहां अमूल प्लांट लगा हैं सिर्फ दूध का व्यापार है। वहां नौजवानों का भविष्य नहीं दिखता। गुजरात में किसान बदहाल हैं। सात हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। वर्ष 2003 के बाद गुजरात में रेल परियोजनाओं पर कोई काम नहीं हुआ है। गुजरात में 85 लाख पंजीकृत बेरोजगार हैं। 45 प्रतिशत महिलाएं कुपोषण की शिकार हैं। राज्यों को 17 जिलों में गंभीर जल संकट है। बीमारों के इलाज के लिए गुजरात में डाक्टरों की बड़ी कमी है। गुजरात में बाल मृत्युदर 48 प्रतिशत है। इस संबन्ध में सबसे बदतर राज्यों में गुजरात का दसवां स्थान है। ग्रामीण गरीबी वहां 51 प्रतिशत है। 15 साल पहले के गुजरात की विकास दर से अब यह 46 प्रतिशत नीचे आ गई है। गुजरात में 02 साल में नौकरियों के शून्य अवसर अंकित किए गये।
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