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सचिन पायलट को राजस्थान और अरुण यादव को मध्य प्रदेश की कमान

मंजरी चतुर्वेदी, नई दिल्ली। पिछले दिनों चार राज्यों की हार के बाद राहुल गांधी ने जिस संगठनात्मक फेरबदल के संकेत दिए थे, उन पर अमल का सिलसिला जा रही है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने सचिन पायलट को राजस्थान और अरुण यादव को मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी। हालांकि विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद दिल्ली और छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमिटी में फौरन फेरबदल कर दिया गया था। दिग्गज नेताओं की मौजूदगी के बावजूद पार्टी ने यदि राजस्थान की कमान अजमेर के युवा सांसद और केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट को दी है, तो इसकी वजह राहुल की युवाओं को मौका देने की सोच है। सचिन न सिर्फ राहुल ब्रिगेड का अहम हिस्सा हैं, बल्कि उनके करीबी भी माने जाते हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश में चल रही आपसी गुटबाजी को खत्म करने के लिए आलाकमान ने स्थापित दिग्गजों की जगह एक युवा को मौका दिया, क्योंकि प्रदेश में हुई पार्टी की हार के लिए यही गुटबाजी जिम्मेदार बताई गई है। गुर्जर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले पायलट ने वार्टन बिजनेस स्कूल से एमबीए किया है। साथ ही सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएट हैं। महज 26 साल की उम्र में सांसद बने सचिन की अपने क्षेत्र में पकड़ और करिश्माई युवा इमेज भी उनके चयन का एक आधार मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पायलट 21 जनवरी को कार्यभार संभालेंगे। मध्य प्रदेश में हुई करारी हार के बाद हाईकमान ने वहां पार्टी की कमान युवा नेता अरुण यादव को सौंपी है। जातिगत समीकरणों को देखते हुए आदिवासी अध्यक्ष के बाद वहां एक ओबीसी को अगुआई का मौका दिया गया है। खरगौरन से सांसद यादव केंद्र में राज्यमंत्री रह चुके हैं और फिलहाल एआईसीसी में सचिव हैं। हालांकि राहुल ब्रिगेड के एक अन्य सदस्य और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम की चर्चा थी, लेकिन सूत्रों के मुताबिक 'आप' की बढ़ती लोकप्रियता के मद्देनजर पार्टी ने एक आम आदमी को कमान सौंपना तय किया। हालांकि प्रदेश में चल रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए भी सिंधिया को कमान नहीं देने फैसला लिया गया, जिसका एक अहम कैंप खुद सिंधिया भी माने जाते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि प्रदेश के कुछ दिग्गजों को सिंधिया के नाम पर ऐतराज था। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, आम चुनावों के मद्देनजर अभी और जगह भी बदलाव होने हैं। जहां तुरंत पीसीसी अध्यक्ष बदलने हैं, उनमें हरियाणा, उत्तराखंड और महाराष्ट्र का नाम प्रमुख है। हरियाणा में युवा सांसद अशोक सिंह तवंर का नाम आगे चल रहा है। इसी तरह उत्तराखंड के पीसीसी प्रमुख यशपाल आर्य को भी बदलने की चर्चा है। महाराष्ट्र के माणिक राव ठाकरे के नाम पर भी चेंज का चक्कर चल रहा है। दरअसल, आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के मद्देनजर ठाकरे की संगठन पर कमजोर होती पकड़ को देखते हुए उनकी विदाई की चर्चा है। (साभार)
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