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पीडितों की सेवा प्रत्यक्ष प्रभु कार्यः स्वामी चिदानन्द सरस्वती

परमार्थ निकेतन अस्पताल में नेत्र चिकित्सा शिविर  
ऋषिकेश। पारमार्थिक कार्यों और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि में लोककल्याणकारी विभिन्न रचनात्मक सेवा कार्यों के लिए मशहूर परमार्थ निकेतन आश्रम में निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का आज विधिवत श्रीगणेश हो गया। श्री स्वामी शुकदेवानन्द धर्मार्थ चिकित्सालय में शुरू हुए नेत्र रोग चिकित्सा शिविर में 150 रोगियों ने अपना पंजीयन कराया है, जो अभी भी जारी है। आज परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ‘मुनि जी महाराज‘ एवं चिकित्सक दल के सदस्यों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर शिविर का शुभारम्भ कराया। स्वामी शुकदेवानन्द अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ. रवि कौशल ने बताया कि तीन दिवसीय इस शिविर में मोतियाबिन्द रोग का निःशुल्क इलाज और आॅपरेशन किया जायेगा। पंजीकरण कराने वाले अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित वर्गों से आए हैं। इन सभी को भोजन और निवास की व्यवस्था परमार्थ द्वारा की गई है। यह शिविर 15 सितम्बर तक चलेगा। परमार्थ निकेतन के प्रवक्ता ने बताया कि गुजरात के रोटरी आई. इन्स्टीट्यूट, नौसारी के सचिव डाॅ. विराल भाई पुरोहित के निर्देशन एवं श्री कैलाश चन्द्र शर्मा के संयोजन में डाॅ. फाल्गुनी मेहता, डाॅ. वैभवी तिवारी, डाॅ. विराल शाह, डाॅ. गाती भट्ट सहित सोलह सदस्यीय चिकित्सा दल इस नेत्र शिविर में सेवा देने के लिए ऋषिकेश आया हुआ है। श्री मुनि जी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि पीडि़तों की सेवा प्रत्यक्ष प्रभु कार्य है। उन्होंने परमार्थ अस्पताल प्रशासन से इस तरह के अन्य चिकित्सा शिविर लगाने को कहा। इस मौके पर उन्होंने आज राधा जयन्ती की भी चर्चा की और कहा कि जब भक्ति कम पड़ जाती है तब शक्ति का दुरुपयोग होता है। उन्होंने भक्ति की शक्ति बढ़ाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि इससे मानव जीवन में सेवा, समर्पण और सत्कार्य में बढ़ोत्तरी होती है।
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