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सोनिया गांधी को एम्स से मिली छुट्टी, खाद्य सुरक्षा बिल लोकसभा में पारित

नई दिल्ली। लोकसभा में फूड सिक्यॉरिटी बिल पर चर्चा के बाद प्रस्तावित संशोधनों पर हो रही वोटिंग के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अचानक तबीयत बिगड़ने से अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। उन्हें इलाज के लिए एम्स में भर्ती करवाया गया, जहां से डॉक्टरों ने देर रात उन्हें छुट्टी दे दी।
दिन भर चली लंबी बहस और अनिश्चितता के बाद आखिरकार यूपीए सरकार का ऐतिहासिक खाद्य सुरक्षा विधेयक लोकसभा में पारित हो गया। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में 82 करोड़ लोगों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराने का प्रावधान है। लोकसभा में विपक्ष के 300 से ज़्यादा संशोधनों को खारिज कर दिया गया। जब लोकसभा में ये विधेयक पारित हुआ तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सदन में मौजूद नहीं थी। विधेयक में जब संशोधनों पर बहस हो रही थी तब तबीयत ख़राब होने के चलते करीब रात 8.15 बजे उन्हें सदन से जाना पड़ा। उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया। बहस के बीच में ही सोनिया गांधी को सदन छोडकर जाना पड़ा। सोनिया के साथ उनके बेटे और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी मतदान में हिस्सा नहीं ले सके। इससे पहले लोकसभा में विधेयक पर विपक्ष की चिंताओं को दूर करने की मांग पर सोनिया गांधी ने कहा कि यह कानून महज़ एक शुरुआत है कि हमें आगे बढ़ना है, रचनात्मक सुझाव का स्वागत है, हमें अनुभव से सीखना होगा। विधेयक पर मतदान से पहले विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि अपरिपक्व और कमज़ोर 'होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी इसका समर्थन करती है। सुषमा ने कहा कि हम उस दिन के इंतजार में हैं, जब हम सत्ता में आएंगे तो हम इस कानून में सुधार करने में सक्षम होंगे। अन्नाद्रमुक बिल का विरोध करने वाली एकमात्र पार्टी थी। दिन भर चली बहस का जवाब देते हुए खाद्य राज्य मंत्री ( स्वतंत्र प्रभार ) केवी थॉमस ने इस आरोप को खारिज कर दिया कि विधेयक का मसौदा तैयार करते समय राज्यों से परामर्श नहीं किया गया। थॉमस ने ज़ोर देकर कहा कि राज्यों से चार बार परामर्श किया गया है। संसद में खाद्य सुरक्षा विधेयक के पारित होने के बाद एक से तीन रुपए प्रति किलो की रियायती दर पर देश की दो तिहाई आबादी को हर महीने 5 किलो तक अनाज मिल सकेगा। लेकिन भाजपा ने इस बिल को सिर्फ चुनावी कदम करार दिया है। मुरली मनमोहन जोशी ने बिल लाने में देरी का कारण पूछा है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि ये खाद्य सुरक्षा बिल नहीं है, ये वोट सुरक्षा बिल है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बिल का खाका तैयार करने में चार साल लग गए। 2009 में जब यूपीए-2 सत्ता में आया तो खाद्य सुरक्षा विधेयक का वादा किया गया था। अब साढ़े चार साल बाद, अब जब वो जाने वाले हैं तो बिल लेकर आए हैं। हम पूछना चाहते हैं कि वो साढ़े चार साल क्या करते रहे। उन्होंने यूपीए सरकार पर इस बिल के ज़रिए लोगों को मूर्ख बनाने का आरोप लगाया। इससे पहले बहस में हिस्सा लेते हुए समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने बिल पर कई सवाल उठाए। मुलायम ने कहा कि ये विधेयक स्पष्ट रूप से चुनाव के लिए लाया जा रहा है...आप पहले इस बिल को क्यों नहीं लाए, जब ग़रीब भूख की वजह से मर रहे थे? मुलायम सिंह यादव ने बिल में कई खामियां गिनाईं। मुलायम सिंह यादव ने कहा कि जिन राज्य सरकारों को ये कानून लागू करना है, उन्हीं से इस बारे में कोई राय नहीं ली गई। उन्होंने मौजूदा बिल को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि किसानों की उपज की खरीद की पक्की गांरटी बिल में कहीं नहीं की गई है। इससे किसान बर्बाद हो जाएंगे। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि बिल में संशोधन की ज़रूरत है और सभी मुख्यमंत्रियों से राय मशविरा करने के बाद ही इसे लागू किया जाना चाहिए। लेकिन जब बिल पर मतदान की बारी आई तो समाजवादी पार्टी ने बिल के पक्ष में मतदान किया। (साभार बीबीसी, एनबीटी)
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