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औद्योगिक नीति फेल, पंजाब सरकार की खनन नीति ने भी बजाई खतरे की घंटी

पंजाब कांग्रेस के उपाध्यक्षों चरणजीत सिंह चन्नी, ओपी सोनी, गुरप्रीत सिंह कांगड़ व तरलोचन सिंह सूंद ने किया खुलासा 
चंडीगढ़। उद्योग नीति में असफल रही पंजाब की आकाली-भाजपा सरकार ने जहां पंजाब के उद्योगों को अन्य राज्यों में जाने को विवश किया है वहीं अब सरकार की खनन नीति ने भी विकास प्रोजेक्टों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। कई कंपनियों ने विकास कार्यों पर काम करने से मना कर दिया है। जो रेत व बजरी के बढ़े रेटों के चलते या तो काम शुरू नहीं कर रही हैं या फिर मध्य में छोड़ रही हैं। यह खुलासा पंजाब कांग्रेस के नेताओं चरणजीत सिंह चन्नी, ओपी सोनी, गुरप्रीत सिंह कांगड़ व तरलोचन सिंह सूंद (सभी उपाध्यक्षों) ने दो इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों द्वारा मैटीरियल की लागत बढऩे के चलते जीरकपुर-बठिंडा हाइवे फोर लेन के प्रोजेक्ट के काम को न लेने के फैसले के बाद किया है। उन्होंने कहा कि कई अन्य कंपनियां जिन्हें विकास कार्यों के टैंडर दिए गए थे, रेत व बजरी के बढ़े रेटों के चलते काम शुरू करने में असफल रही हैं। महत्वपूर्ण रूपनगर बाइपास का प्रोजेक्ट कंपनी द्वारा इन्हीं कारणों से मध्य में ही छोड़ दिया गया। इनमें से ज्यादातर प्रमुख प्रोजेक्टों के निर्माण के लिए पैसा केन्द्र सरकार द्वारा फाइनांस किया गया है। जिसके चलते प्रदेश कांग्रेस ने केन्द्र सरकार से दखल देने व राज्य सरकार से जवाब मांगने को कहा है। उन्होंने डर जताया कि आकाली-भाजपा की खनन नीति कहीं प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह द्वारा हाल ही में किए गए ऐलान कोलकाता-अमृतसर इंडस्ट्रियल कोरिडोर को भी पटरी से न उतार दे। कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि आकाली-भाजपा उद्योग के लिए लाभदायक नीति बनाने में असफल रही है और उद्योग को जरूरी बिजली उपलब्ध नहीं करवाई जा रही। इसके अलावा कच्चे माल पर भारी करों ने उद्योगों को अन्य राज्यों में जाने को मजबूर कर दिया है। उद्योग नीति 2013 में राज्य में लगने वाले नए उद्योगों को लाभ देने का ऐलान किया गया है, मगर मौजूदा उद्योगों के लिए कुछ नहीं है। कांग्रेसी नेताओं ने उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल को अपने विकास संबंधी दावों को साबित करने को कहा है। यहां छोटे उद्योगपतियों व स्थानीय व्यापारियों के लिए कोई भविष्य नहीं है। सुखबीर हर बिजनेस पर कब्जा करते जा रहे हैं। इंडस्ट्रीज को सुविधा देना व विकास प्रोजेक्टों के लिए कम रेटों पर निर्माण सामग्री उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। रेत खदानों पर कुछ लोगों के कब्जे ने आम आदमी के लिए इसको सोने के भाव पर पहुंचा दिया है। जो रेत कांग्रेस सरकार में 2007 में 500 से 600 रुपए प्रति स्क्वायर फीट मिलती थी, अब वह आकाली-भाजपा शासन में 5000 से 6000 रुपए प्रति स्क्वेयर फीट पर पहुंच गई है। जो आकाली-भाजपा सरकार द्वारा खनन नीति में बदलाव व इसको अपने चहेतों को देने का नतीजा है। पंजाब कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आकाली-भाजपा सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा रेत की खदानों पर दिए स्टे का दुरुपयोग कर रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी राज्यों को जारी निर्देशों ती धज्जियां उड़ाकर रेत माफिया गैर कानूनी खनन में लगा हुआ है और रेत को महंगे रेटों पर बेचा जा रहा है। जबकि उप मुख्यमंत्री रेत को गोदामों में रखने व सब्जी मंडी की तरह रेत मंडी लगाने संबंधी बेतुके बयान दे रहे हैं। 
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