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परमार्थ द्वार पर रौद्र रूप गंगा के सम्मुख गंगा भक्तों ने की प्रार्थना

ऋषिकेश। तीर्थनगरी में मां गंगा के विकराल रूप और भारी बारिश के बावजूद देश विदेश के सैकड़ों लोग परमार्थ निकेतन के द्वार पर एकत्र हुए। गंगा आरती परमार्थ निकेतन आश्रम के मुख्य द्वार पर सम्पन्न हुई। सभी ने भक्ति भाव से गंगा आरती की तथा गंगा भक्तों ने रौद्र रूप गंगा के सम्मुख खड़े होकर उनके शान्त होने की प्रार्थना की। इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ‘मुनि जी महाराज‘ ने उपस्थित जनसमुदाय से गंगा को आगे प्रदूषित नहीं करने का आह्वान किया। श्री मुनि जी महाराज ने कहा कि गंगाजी ने अपने जन्म दिवस पर गोमुख से गंगासागर तक के निवासियों, किसानों, नगर निकायों, उद्योगों, सरकारों सभी को एक सन्देश दिया है। इसे प्रकृति की चेतावनी समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार दैवीय शक्तियां विपदाओं को अपने ऊपर लेकर लोगों की रक्षा करती हैं और भविष्य के लिए कई संकेत देती हैं। सदैव कल्याण करने वाले भगवान शिव भी इन दिनों यही भूमिका निभा रहे हैं। बस जरूरत है कि मानव अब चेते और प्रकृति से छेड़छाड़ अब बन्द कर दे। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में हुई जान माल की हानि पर चिन्ता व्यक्त की और दिवंगतों की शान्ति व सद्गति की प्रार्थना की।
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