ताज़ा ख़बर

दस वर्षों में डेढ़ दर्जन लोगों को निगल चुका है विषैला पानी

ग्राम मौहम्मदपुर शकिस्त में कैंसर से हो चुकी हैं मौतें 
सुनील चैधरी, बहसूमा (मेरठ)। ग्राम मौहम्मदपुर शकिस्त का पानी विषैला होता जा रहा है। गांव में 10 वर्षों में कैसर से ड़ेढ दर्जन मौतें हो चुकी हैं। विषैले पानी के कारण गांव में अधिकांश लोगो ने फिलटर लगवा लिये है। 2 जून को भी कैसर से पीडि़त एक महिला की मौत हो गई। लगातार हो रही मौतों से ग्रामीण भयभीत है लेकिन स्वास्थ्य विभाग नीद सोया हुआ है। मेरठ जनपद मुख्यालय से करीब 45 किलो मीटर की दूरी पर बसा ग्राम मौहम्मदपुर शकिस्त के ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। गांव की आबादी तीन हजार है। पिछले 10 वर्षो में गांव को पता नही किसकी नजर लगी गांव के हंसते-खेलते परिवार में मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। इन दस वर्षों में कैसर जैसी भयानक बिमारी से ड़ेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग मौत का शिकार हो चुके हैं। यही नहीं आसपास के मौड़खुर्द, रामराज, मौड़कला, सदरपुर आदि गांव में कैसर से मौतें हो चुकी हैं। ग्राम मौहम्मदपुर शकिस्त में अशोक पुत्र राम सिंह, महेन्द्र पुत्र मंगल, ब्रजवीर पुत्र महेन्द्र, विमला पत्नी राजपाल, राजबीर पुत्र प्रकाशे, वेदवती उर्फ वेदो पत्नी नैन सिंह, किशनदेई पत्नी हरपाल, सतपाल पुत्र सुरजमल, शांति पत्नी रघबीरा,महाबीर पुत्र हंसा, बीरसिंह पुत्र हंसा, शौराज पुत्र ड़ाल्लू, गयुर पुत्र सुबेदीन, सतेन्द्र पुत्र धर्मपाल, सुरेश पुत्र त्रिमल अब तक मौत का शिकर हो चुके हैं। जबकि इन गांवो में कई लोग कैसर से पीडि़त हैं, जो दिल्ली, चंडीगढ़ व देहरादून में अपना इलाज करा रहे हैं। 2 जून को ग्राम मौहम्मदपुर शकिस्त में कैसर से पीडि़त महिला संगीता पत्नी विकास की मौत हो गई। एक माह पहले ही कैंसर से पीडित संगीता का आपरेशन कराया गया था। ग्रामीणो का आरोप है कि वह स्वास्थ्य विभाग को लिखित व मौखिक रूप से गांव के पानी की जांच कराने की मांग वर्षों से कर रहे हैं। लेकिन विभाग के अधिकारियो व कर्मचारियो पर कोई असर नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का पानी विषैला होने की आंशाका है। मौहम्मदपुर शकिस्त के ग्रामीण दूषित पानी पीने के कारण पेट रोग से पीड़ित हैं। कुछ ग्रामीणों के पेट में पथरी है तो कुछ उसका आंपरेशन हो चुका है। इस संबंध में नगर के प्रमुख चिकित्सक डा.पवन गोयल ने बताया कि पानी में आग्रशैनिक अम्ल की मात्रा बढ़ने से कैंसर होता है। जबकि दूषित पानी पीने से भी कैंसर होता है। पानी को उबालकर ठंड़ा करने के पश्चात उपयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि शरीर में कैल्शियम व कौल्सट्रोल की मात्रा बढ़ने से पेट में पथरी बनती है। घरों में खाने के लिए उपयोग होने वाले तेल को दो बार से अधिक पकने पर उपयोग में ना ले। जबकि बाजार में एक ही तेल को बर्तन में कई-कई बार पकाकर खाने की वस्तुए बनाई जाती है। ऐसे वस्तुए खाने से बचना चाहिए। वही इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के हस्तिनापुर प्रभारी डा.दिनेश खत्री का कहना है कि उन्हें अभीतक किसी ने यह जानकारी नहीं दी है। अगर ऐसा है तो वह पानी की जांच के लिए जलकल विभाग को पत्र लिखेगे। कैसर के बारे में तक यह स्पष्ट नहीं है कि वह किस वस्तु के अधिक सेवन से होता है। वह शीघ्र ही गांव का सर्वे कराकर पता करायेगें कि गांव में इतनी मौतें पेट के कैंसर से हुई है या अन्य अगों में हुए कैसर से। वह सर्वे कराने के पश्चात उच्चाधिरियों को रिपोर्ट भेजेंगे। वहीं ग्रामीण कैसर से लगातार हो रही मौतों से भयभीत है।
  • Blogger Comments
  • Facebook Comments

0 comments:

Post a Comment

आपकी प्रतिक्रियाएँ क्रांति की पहल हैं, इसलिए अपनी प्रतिक्रियाएँ ज़रूर व्यक्त करें।

Item Reviewed: दस वर्षों में डेढ़ दर्जन लोगों को निगल चुका है विषैला पानी Rating: 5 Reviewed By: न्यूज़ फ़ॉर ऑल