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गायत्री महामन्त्र का विस्तार है श्रीमद्भागवतः सन्त श्री रमेश भाई ओझा

हरिः शरणं, हरिः शरणं, हरिः शरणं से गूँजा परमार्थ गंगातट 
ऋषिकेश। श्रीमद्भागवत गायत्री मन्त्र का विस्तार मात्र है। गायत्री मन्त्र को महामन्त्र की संज्ञा इसीलिए दी गई है। भगवान द्वारा धर्म की स्थापना और उसकी रक्षा की जाती है, लेकिन धर्म में विभिन्न कारणों से व्याप्त हो गए विषाद को दूर करने का काम सन्तों एवं महापुरुषों द्वारा किया जाता है। धर्म का प्रयोजन मोक्ष है। हमारे कर्म धर्म से जुड़े होने चाहिए। दूकान को मन्दिर की तरह जरूर चलाओ, लेकिन मन्दिर को दूकान की तरह चलाना कत्तई उचित नहीं है। 24 मई को भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन उपस्थित कथाप्रेमियों को सम्बोधित करते हुए यह उद्गार आज प्रख्यात भागवताचार्य सन्त श्री रमेश भाई ओझा ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि धनवान बनना पाप नहीं, वरन् धनवान बनने के लिए पापकर्म करना धरती का महापाप है। भागवत के पाँच भागों- चरित्र, रूपक, उपदेश, गीत और स्तुति का उन्होंने विस्तार से वर्णन किया। बुद्धि को ईश्वर को समर्पित करने का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि तर्क सामने वाले को परास्त तो कर सकता है लेकिन स्वयं जीत नहीं सकता। तर्क निरुत्तर तो कर सकता है लेकिन वह स्वयं में उत्तर नहीं है। उन्होंने कहा कि काम, क्रोध, मोह और लोभ के अधीन रहने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता। तृष्णा को जीवननाशिनी अग्नि की संज्ञा देते हुए उन्होंने तृष्णा को कृष्णा-प्रेम में बदलने की राय श्रोताओं को दी। भाईश्री ने नीतिवान तथा धर्मवान जैसे मानवीय गुणों की चर्चा करते हुए मानव मात्र को उन्हें आत्मसात करने को कहा। धन (लक्ष्मी) का उपयोग माता के पयपान की तरह करने का परामर्श देते हुए उन्होंने कहा कि लक्ष्मी जब आती है तब लात मारती है और जाती है तब भी लात मारती है। दोनों समयों पर लात मारने वाली लक्ष्मी इसीलिए दौलत कहलाती है। लोक कल्याण में लगने वाली बुद्धि को भी उन्होंने लक्ष्मी की संज्ञा दी। गीता के तीसरे अध्याय कर्मयोग का विवेचन करते हुए सन्त श्री रमेश भाई ओझा ने गीता के कई उद्धरण सुनाए और कहा कि गृहस्थों को कर्म छोड़ने की प्रेरणा देना किसी भी दशा में उचित नहीं है। जीवन को सहजता के साथ जीने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने संन्यास को भागने नहीं, जागने का आश्रम बताया। सूर्य से प्रेरणा लेकर सदैव सक्रिय रहने की बात कहते हुए उन्होंने ऊर्जावान व परोपकारी जीवन को ईश्वर की बड़ी नियामत कहा। सूर्यदेव (सविता) को इसीलिए गायत्री मन्त्र का अधिष्ठाता देवता कहा गया है। संगीतमय भागवत कथा आगन्तुक श्रोताओं को गहरे तक संस्पर्श और भावविभोर कर रही है। भाईश्री की संगीत टोली में नई दिल्ली निवासी बायोलीन वादक युनुष भाई, पाटन-गुजरात निवासी तबला वादक मुकेश भाई रावल, बड़ौदा निवासी गायक व हारमोनियम वादक बालकृष्ण व्यास, पाटन निवासी गायक धर्मेश भाई, पोरबंदर निवासी गायक भाई शंकर एवं असम निवासी बांसुरी वादक विजय भाई महापात्र शामिल हैं। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष श्री स्वामी चिदानन्द सरस्वती ‘मुनि जी महाराज’ ने परमार्थ निकेतन के समाजनिष्ठ कार्यक्रमों में पर्यावरण संरक्षण एवं गंगा, यमुना आदि नदियों के संरक्षण को प्रमुख बताया। उन्होंने कहा कि गंगा एक्शन परिवार-परमार्थ निकेतन के ‘धर्मतन्त्र से लोक जागरण’ कार्यक्रमों में गंगा आरती को एक सशक्त माध्यम बनाया गया है। उन्होंने ऋषिकेश, वाराणसी, गंगोत्री, प्रयाग आदि की गंगा आरती के प्रभावों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि पंच प्रयाग, पटना, मुम्बई, कोलकाता में गंगा व गंगासागर पर आरती शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। श्री मुनि जी महाराज ने स्पेन, मारीशस, इण्डोनेशिया आदि में उत्तराखण्ड से गंगाजल ले जाकर बनाए गए सरोवरों पर भी गंगा आरती की शुरुआत कराने की बात कही। कथा में स्वामी शुकदेवानन्द ट्रस्ट के प्रमुख महामण्डलेश्वर श्री स्वामी असंगानन्द सरस्वती, गायत्री परिवार प्रमुख एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलाधिपति डाॅ0 प्रणव पण्ड्या, यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सन्त श्री स्वामी जयकृष्ण दास, स्वामी नारायण दास, यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री राकेश यादव एवं श्री हरीश ठेनुआ, साध्वी भगवती सरस्वती, स्वामी योगानन्द, इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस गिरधर मालवीय, उत्तराखण्ड के उप निदेशक समाज कल्याण श्री एन0 के0 शर्मा, कथा महोत्सव के संयोजक श्री केशव जालान, श्री सूर्यकान्त जालान एवं श्री कृष्ण कुमार जालान आदि मौजूद थे। भारत सरकार के सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग सचिव श्री माधव लाल भी आज अपराह्नकाल परमार्थ निकेतन पहुँचे और सन्त श्री रमेश भाई ओझा एवं श्री स्वामी चिदानन्द सरस्वती से मुलाकात की। केन्द्रीय उद्योग सचिव ने गंगा आरती में भी भाग लिया। उन्होंने उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों से बढ़ते पलायन पर चिन्ता व्यक्त करते हुए ग्रामोद्योगों की श्रृंखला को गाँव-गाँव तक विस्तार देने का आग्रह गंगा एक्शन परिवार-परमार्थ निकेतन जैसी संस्थाओं से किया। कार्यक्रम का समापन श्री दिलीप क्षेत्री एवं सुभाष क्षेत्री की अगुवाई में श्री दैवी सम्पद अध्यात्म संस्कृत महाविद्यालय के ऋषिकुमारों के भावपूर्ण संगीत के साथ हुआ।
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