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परमार्थ गंगा तट पर सजा दिव्य मण्डप, भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ सप्ताह आरम्भ

सन्त श्री रमेश भाई ओझा ने बहाई ज्ञान गंगा, श्री मुनि जी महाराज ने रखी ग्रीन कथा की अभिनव अवधारणा 
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के मुख्य द्वार पर स्थित विशाल सभागार में रविवार (19 मई) आज भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह समारोहपूर्वक शुरू हो गया। भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर परम भागवताचार्य सन्त श्री रमेश भाई ओझा के अलावा श्री दैवी सम्पद मण्डल एवं स्वामी शुकदेवानन्द ट्रस्ट के प्रमुख महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती, मथुरा स्थित काष्णि पीठाधीश्वर स्वामी गुरुशरणानन्द, जयराम आश्रम हरिद्वार/ऋषिकेश के प्रमुख स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, हरिद्वार स्थित कालीपीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानन्द ब्रह्मचारी, लेटे हनुमान जी मन्दिर बाघम्बरी इलाहाबाद के पीठाधीश्वर महन्त नरेन्द्र गिरि, निरंजनी अखाड़ा हरिद्वार के सचिव महन्त श्री रामानन्द पुरी इत्यादि सन्त व महन्त, स्वर्गाश्रम, गीता भवन, वानप्रस्थ आश्रम आदि आश्रमों के प्रबन्धक एवं कथाप्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद थे। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ‘मुनि जी’ ने मुख्य कथावाचक श्री रमेश भाई ओझा एवं उपस्थित सन्तों एवं अध्यात्मप्रेमियों का अभिनन्दन करते हुए देश के प्रमुख उद्योगपति दीन दयाल जालान के तपस्वी एवं अध्यात्मनिष्ठ जीवन को याद किया। इस मौके पर स्वर्गाश्रम क्षेत्र से लम्बे समय तक जुड़े रहे प्रख्यात उद्योगपति हनुमान प्रसाद पोद्दार, जयदयाल गोयनका तथा स्वामी रामसुखदास व स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती आदि सन्तों की सेवाओं को भी उन्होंने याद किया। श्री मुनि जी महाराज ने सन्तों की दिवंगत काया को गंगाजी में न जाने देने के प्रस्ताव को सन्त समुदाय द्वारा पूरी सकारात्मकता के साथ लेने के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने भागवत कथाओं व रामकथाओं को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के लिए कथाकार सोशल रिस्पांसिबिलिटी (केएसआर) पर काम करने का आह्वान देश के कथावाचकों से किया। श्री मुनि जी महाराज ने ग्रीन कुम्भ की तरह ग्रीन कथा की अवधारणा पर भी प्रकाश डाला और कहा कि कथाओं में प्लास्टिक की चीजों का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। भागवत कथा के उद्घाटन सत्र में कथा प्रवेश कराते हुए सन्त श्री रमेश भाई ओझा ने श्रीमद्भागवतकथा को इस युग में भगवान की वाणी बताया। उन्होंने कहा कि कलियुग में कथा श्रवण प्रभु प्राप्ति का सबसे सहज और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने तीर्थनगरी ऋषिकेश में गंगा किनारे भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ को प्रभु की विशेष इच्छा बताया और कहा कि भागवत कथा व्यक्ति की आध्यात्मिक प्यास को बुझा देती है। ‘ऊँ नमो वासुदेवाय नमः आदि मंत्रसूत्रों से भाईश्री द्वारा कराए गए संकीर्तन से उपस्थित जनसमुदाय में भक्ति की सरिता बह उठी। उद्घाटन सत्र में बोलते हुए स्वामी कैलाशानन्द ब्रह्मचारी ने कहा कि जो भागवत को समझ लेता है वह श्रीकृष्ण को पा लेता है। उन्होंने कहा कि गंगा को देखने, आचमन, मुख प्रक्षालन व स्नान करने मात्र से व्यक्ति को मोक्ष मिल जाता है। स्वामी गुरुशरणानन्द ने ‘ठाकुर हमरे रमण बिहारी, हम हैं रमण बिहारी के’ संकीर्तन से अपनी बात आरम्भ की और कहा कि संस्कार प्रदान करना और संस्कार प्राप्त करना पिता व पुत्र के बीच का सर्वोच्च उपादान है। कल्याण पत्रिका से जुड़े श्री राधेश्याम खेमका, गीता भवन के प्रबन्धक श्री गौरीशंकर मोहता ने भी इस मौके पर अपने विचार व्यक्त किए। कथा समारोह में वाराणसी से आए श्री केशव जालान, सूर्यकान्त जालान ‘कानू‘ एवं श्री कृष्ण कुमार जालान, श्री लक्ष्मी नारायण बियानी सहित कई गण्यमान व्यक्ति तथा देश के विभिन्न अंचलों से आए हजारों श्रद्धालु मौजूद थे। 26 मई तक कथा का समय पूर्वाह्न 09.30 से अपराह्न 1.00 बजे तक रहेगा।
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