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महाराजगंज में ब्राम्हणों के शंख से हुआ बसपा का सियासी शंखनाद




अंबेडकर और कांशीराम के साथ मंच पर लगाया गया परशुराम का भी चित्र, वेदमंत्र, अक्षय तृतीया, रामचरित मानस और तिलक-चोटी ने बनाया माहौल

महराजगंज। वेदमंत्र और रामचरितमानस की चौपाई में लिपटा बसपा का सियासी संदेश 12 मई को ब्राम्हणों के शंख से चुनाव का शंखनाद कर दिया। धार्मिक अनुष्ठान की आभा में लिपटा पार्टी का ब्राम्हण सम्मेलन डा.अंबेडकर और कांशीराम के चित्रों के साथ भगवान परशुराम के भी चित्र को जोड़ा। यूं कहें कि मौका के अनुरूप तैयार माहौल अपनी अपील करने में सफल दिखा। गोरखपुर से आए शिखा और तिलक वाले पीतवस्त्री ब्राम्हणों की पहली पंक्ति में उपस्थिति पूरे कार्यक्रम के दौरान ब्राम्हण सत्ता का प्रतीक बनी रही। उनके शंख की ध्वनि और वेदमंत्र के सामूहिक गान ने स्पष्ट कर दिया कि तैयारी बेहद सूझबूझ से की गई है। मंच पर पूर्वांचल के बड़े ब्राम्हण चेहरों के बीच से उठे लोकसभा प्रत्याशी काशीनाथ शुक्ला ने मुख्य अतिथि और बसपा सुप्रीमो मायावती के कथित दूत सतीश मिश्रा को मां दुर्गा की प्रतिमा भेंट करने के बाद ब्राम्हणों को उनके गौरवशाली अतीत और वैश्विक वर्तमान से रूबरू कराया। ब्राम्हण होने को गौरवशाली बताते हुए यह भी बताने में सफल हुए कि मंच ब्राम्हणों के नाम है और पार्टी के झंडा के साथ वह ब्राम्हणों के शुभचिंतक हैं। मुख्य अतिथि सतीश मिश्रा ने भी परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया के बहाने मंच को ब्रम्हणत्व दिया। बीच में परशुराम और श्रीराम के संवाद के मार्फत रामचरित मानस की चौपाई भी पढ़ी। अंत में उनका यह कहना ब्राम्हणों के हृदय में सीधे उतर गया कि जब तक सांस है, उनकी जिंदगी ब्राम्हणों के उत्थान और ब्राम्हणों को सम्मान देने वाली बसपा को समर्पित रहेगी। उधर, अपने करीब चालीस मिनट के संबोधन में सतीश मिश्र ब्राम्हणों को रिझाए तो दलितों को भी चिपकाए रखे। आखिर में उन्होंने अपने इस मंत्र से पर्दा भी उठा दिया। कहा कि ब्राम्हण और दलित साथ हो जाएं तो हाथी को कोई रोक नहीं सकेगा। ब्राम्हण बसपा को क्यों सोचे, जैसे स्वाभाविक सवाल का उन्होंने तार्किक जवाब दिया। लोकतंत्र का पन्ना पलटा और स्पष्ट कर दिया कि बसपा से जुड़ने के पहले और जुड़ने के बाद ब्राम्हणों की स्थिति में क्या अंतर आया। जिक्र किया कि 09 जून 2005 को लखनऊ में हुए ब्राम्हण सम्मेलन में सुश्री मायावती ने नारा बदलते हुए कहा था कि-जिसकी जितनी तैयारी उसकी उतनी हिस्सेदारी..। फिर उन्होंने 2007 के विधानसभा चुनाव में ब्राम्हणों की तैयारी के परिणामों को भी समझाया। बताया कि हुकूमत में ब्राम्हणों की शानदार हिस्सेदारी आई।
मनोज टिबड़ेवाल के घर पहुंचे सतीश मिश्र 
ब्राम्हण सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने आए बसपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य सतीश मिश्र दूरदर्शन के वरिष्ठ पत्रकार मनोज टिबड़ेवाल से मिलने उनके घर पहुंचे। उनके साथ सांसद भीष्मशंकर उर्फ कुशल तिवारी, विधायक देवनारायण उर्फ जीएम सिंह और निर्मेश मंगल आदि भी थे। घर आए मनोज टिबड़ेवाल से अनौपचारिक मुलाकात के दौरान मिश्र ने उनके शिशु पुत्र गणेशा से भी मिले और उसे प्यार तथा आशीष दिया।
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